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HomeStatesMadhya Pradeshभोपाल में 400 मीट्रिक टन क्षमता की बॉयो सीएनजी इकाई निर्माणाधीन

भोपाल में 400 मीट्रिक टन क्षमता की बॉयो सीएनजी इकाई निर्माणाधीन

भोपाल

प्रदेश में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वेस्ट टू वेल्थ के सपने को साकार करने की दिशा में नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा ठोस प्रयास किये जा रहे है। इन प्रयासों से नागरिकों को स्वच्छ ऊर्जा प्रदान की जा रही है। इससे शहरी क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में विशेष प्रयास किये जा रहे हैं। भोपाल के आदमपुर क्षेत्र में 400 मीट्रिक टन प्रतिदिन क्षमता की बॉयो सीएनजी इकाई निर्माणाधीन है, जिसमें 120 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। इसके लिये इन्वायरो प्रायवेट लिमिटेड संस्था से पीपीपी मॉडल पर अनुबंध किया गया है। इस अनुबंध के तहत जल्द ही इकाई का संचालन प्रारंभ किये जाने के प्रयास किये जा रहे है।

प्रदेश में शहरी स्थानीय निकायों में निकलने वाले गीले कचरे का प्रबंधन बेहतर तरीके से किया जा रहा है। मध्यप्रदेश देश के अन्य राज्यों में इस मामले में आदर्श बनकर उभर रहा है। इसके लिये शहरी गीले कचरे से बॉयो गैस और सीएनजी बनाने की बहुउद्देश्यीय इकाइयों की स्थापना का नीतिगत निर्णय लिया गया है। इस दिशा में इंदौर में बेहतर काम हुआ है।

इंदौर

इंदौर शहर में चौड्यराम सब्जी मण्डी से निकलने वाले गीले कचरे से 20 टन प्रतिदिन और कबीटखेड़ी से 15 टन प्रतिदिन बाँयो गैस निर्माण की इकाइयों की स्थापना की जा चुकी है। इन इकाइयों में पीपीपी मोड पर करीब 15 करोड़ रुपये राशि का निवेश किया गया है। इंदौर नगर निगम द्वारा देवगुराड़िया में 550 मीट्रिक टन प्र-संस्करण क्षमता का गोबरधन बॉयो सीएनजी संयंत्र स्थापित किया जा चुका है। इस इकाई से लगभग 17 हजार 500 किलोग्राम बाँयो सीएनजी और 100 टन उच्च गुणवत्ता वाली कम्पोस्ट का उत्पादन किया जा रहा है। इस परियोजना को इन्वायरमेंटल इन्फ्रास्ट्रक्चर एण्ड सर्विसेस लिमिटेड और जर्मन कम्पनी प्रोवेप्स के साथ पीपीपी मोडल आधार पर तैयार किया गया है।

ग्वालियर

ग्वालियर नगर निगम क्षेत्र में 8 हजार गायों से प्राप्त होने वाले गोबर को कचरा प्र-संस्करण संयंत्रों से बायों गैस बनाने के प्रयास किये जा रहे हैं। इसके लिये 100 टन प्रतिदिन क्षमता की इकाई गौशाला के नजदीक ही बनाई गई है। इसके साथ ही ग्वालियर में ही एक और बायो गैस संयंत्र स्थापित किया जा रहा है। जिसकी क्षमता 435 टन प्रतिदिन प्रस्तावित की गई है।

अन्य शहरी स्थानीय निकायों में प्रयास

क्लस्टर आधार पर मुरैना, बुरहानपुर, खण्डवा, देवास, रतलाम और उज्जैन में स्टेण्डअलोन योजना के अतर्गत गीले कचरे से बायो गैस बनाने के लिये लघु परियोजना के क्रियान्वयन की दिशा में प्रयास किये जा रहे हैं। इनकी क्षमता 600 टन प्रतिदिन होगी।

नगरीय विकास मंत्री के निर्देश

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने शहरी नगरीय निकायों में निकलने वाले गीले कचरे के बेहतर प्रबंधन और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन इकाइयों के प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने कहा कि नगरीय निकायों द्वारा प्रस्तावित इकाइयों को राज्य सरकार द्वारा हरसंभव सहयोग प्रदान किया जायेगा।