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सपा और आप से करार फिर भी बंगाल-महाराष्ट्र कांग्रेस के लिए मुश्किलें बरकार

नई दिल्ली

समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी के साथ कांग्रेस गठबंधन बनाए रखने में कामयाब रही, मगर उसकी मुश्किलें अभी खत्म होने वाली नहीं हैं। मुख्य विपक्षी दल के सामने पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र सवाल बनकर खड़े हैं। इन दोनों राज्यों में भी सीटबंटवारे को लेकर बातचीत जारी है, लेकिन रास्ता निकलता नहीं दिख रहा है। लोकसभा चुनाव अब कुछ ही महीने दूर है। इसके बावजूद, इंडिया गठबंधन अभी तक भाजपा की मजबूत चुनावी मशीनरी के खिलाफ प्रचार शुरू नहीं कर पाया है। यह स्थिति कांग्रेस आलाकमान को परेशान करने वाली है।

 

बंगाल में तो मुश्किल लग रहा गठबंधन

बंगाल में तृणमूल कांग्रेस को साथ लाना कांग्रेस के लिए आसान नहीं होगा। सीट बंटवारे तो लेकर टीएमसी के साथ बातचीत एक बार विफल हो चुकी है। तृणमूल प्रमुख और राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान भी कर दिया था। उन्होंने कहा कि गठबंधन पर अब कोई भी फैसला चुनाव के बाद होगा। बताया जाता है कि सीनियर लीडर अधीर रंजन चौधरी के नेतृत्व वाली स्टेट कांग्रेस यूनिट ने 10 सीटों की मांग रखी थी, मगर TMC उसे 2 सीटें देने पर ही सहमत थी। चौधरी इसे लेकर तृणमूल प्रमुख के खिलाफ अपना आक्रोश भी जता चुके हैं। उन्होंने ममता को अवसरवादी कहा था।

 

कल यानी शनिवार को ही अधीर रंजन चौधरी ने सीट बंटवारे के मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस पर फिर से निशाना साधा था। उन्होंने कहा कि टीएमसी दुविधा में फंसी हुई हैं। अधीर ने कहा, 'तृणमूल के भीतर एक वर्ग का मानना है कि अगर पार्टी इंडिया गठबंधन के बिना अकेले चुनाव लड़ी, तो पश्चिम बंगाल के अल्पसंख्यक उसके खिलाफ हो सकते हैं। तृणमूल का दूसरा धड़ा यह चाहता है कि गठबंधन जारी रहे। दुविधा इस बात को लेकर है कि अगर बंगाल में गठबंधन को ज्यादा महत्व दिया तो मोदी सरकार उनके खिलाफ ईडी और सीबीआई का इस्तेमाल करेगी। इन दुविधाओं के चलते ही टीएमसी कोई फैसला नहीं कर पा रही है।' दोनों दलों के बीच गतिरोध के चलते बंगाल से गुजरने वाली राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा में ममता शामिल नहीं हुईं। इससे यह संदेश साफ तौर पर गया कि इंडिया गठबंधन के भीतर एकता की कमी है।

 

महाराष्ट्र में भी फंस गया है पेच

महाराष्ट्र में भी इंडिया गठबंधन अभी तक सीटबंटवारे को फाइनल नहीं पाया है। कांग्रेस, शिवसेना (बालासाहेब उद्धव ठाकरे) और एनसीपी के शरद पवार के नेतृत्व वाला गुट फिलहाल महा विकास अघाड़ी के हिस्से हैं। बताया जा रहा है कि इस तीनों के बीच चर्चा अंतिम चरण में है। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस नेता राहुल गांधी गतिरोध को लेकर ठाकरे से बात कर चुके हैं। कांग्रेस मुंबई की 6 लोकसभा सीटों में से 3 (मुंबई दक्षिण मध्य, मुंबई उत्तर मध्य और मुंबई उत्तर पश्चिम) की मांग कर रही है। ठाकरे राज्य में 18 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ना चाहते हैं, जिनमें मुंबई की 4 सीटें (मुंबई दक्षिण, मुंबई उत्तर पश्चिम, मुंबई उत्तर पूर्व और मुंबई दक्षिण मध्य) शामिल हैं। अब यह देखना होगा कि इसका क्या हल निकलता है।

 

महाराष्ट्र में कांग्रेस के तीन सीनियर नेता (मिलिंद देवड़ा, अशोक चव्हाण और बाबा सिद्दीकी) हाथ का साथ छोड़ चुके हैं। लोकसभा चुनाव से पहले निश्चित तौर पर इससे मुख्य विपक्षी दल को झटका लगा है। महाराष्ट्र में इंडिया गठबंधन के सामने चुनौती 2 मुख्य पार्टियों शिवसेना और एनसीपी में हुई फूट भी है। हालत यह है कि उद्धव ठाकरे और शरद पवार ने पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न तक खो दिया है। अब इन्हें अपने नए चुनाव चिह्न के साथ मतदाताओं के बीच जाना है। यह सब इतना आसान नहीं रहने वाला है। खासतौर से ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में लोगों के बीच जागरूकता फैलानी होगी और उन्हें अपने चुनाव चिह्न के बारे में बताना होगा। इस तरह की स्थिति से सत्ताधारी गठबंधन को बढ़त मिलती दिखती है।