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Conspiracy! हवाला से बने 13 हजार अवैध मदरसे, विदेशी फंडिंग पर इडी की नजर

लखनऊ

 यूपी में पिछले 17 वर्षों में बेहिसाब अवैध मदरसे बने हैं, इनमें से कई का निर्माण नेपाल और बिहार सीमा पर संवेदनशील इलाकों में हुआ हैं। एडीजी एटीएस मोहित अग्रवाल की अध्यक्षता में गठित एसआईटी ने यूपी में चिह्नित लगभग 13 हजार मदरसों को बंद कराने की सिफारिश की है।

SIT की जांच में पता चला है कि मदरसों का निर्माण हवाला से आई रकम से हुआ है। विदेशी फंडिंग के स्रोत आतंकी संगठनों से जुड़े होने की आशंका को देखते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की भी इस मामले पर नजर है। दरअसल, यूपी सरकार के आदेश पर गठित इस तीन सदस्यीय कमेटी में निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण को भी शामिल किया गया था। शासन को सौंपी गई रिपोर्ट में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के स्तर से कार्रवाई की जाएगी।

किसी सरकारी विभाग की निगरानी में भी नहीं हैं मदरसे
एसआईटी की जांच में पता चला है कि लगभग 13 हजार मदरसे बिना मान्यता के संचालित हो रहे हैं। इस वजह से वे किसी सरकारी विभाग की निगरानी में भी नहीं हैं। इन मरदसों के पास न तो खेलकूद का मैदान है और न ही आय-व्यय का हिसाब-किताब।

हवाला से रकम पहुंचाने की मकसद की जांच
जांच में मदरसों ने चंदे से संचालन की बात तो कही, लेकिन हिसाब नहीं दे पाए। रकम न ही उनके बैंक खातों में मिली और न ही लाखों-करोड़ों का निर्माण आखिर कैसे कराया गया, यह पता चल सका। ऐसे में शक हुआ है कि इन मदरसों को हवाला के जरिये पैसा पहुंचाया गया। हवाला से रकम पहुंचाने का क्या मकसद था। आखिर यह आय कहां से आई? इन मदरसों को नेपाल-भारत सीमा पर बनाने का क्या मकसद था। प्रदेश का गृह विभाग इन पर विचार कर रहा है।

इस जिले में सबसे ज्यादा 800 अवैध मदरसे
संभावना यह भी जताई गई है कि इस खेल में आईएसआई या किसी विदेशी खुफिया एजेंसी का भी हाथ हो सकता है। गृह विभाग जल्द ही आयकर और ईडी के जरिये जांच करवा कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी में है।

सूत्रों के अनुसार, जांच में श्रावस्ती में 400, बहराइच में 600, महराजगंज में 550, सिद्धार्थनगर में 800, गोंडा में 500 और देवरिया में लगभग 350 गैर मान्यता प्राप्त मदरसे मिले हैं। ये मदरसे में संवेदनशील क्षेत्रों में हैं। ष्टि हुई थी। इसके बाद राज्य सरकार ने मदरसों की गहनता से जांच के लिए एसआईटी का गठन किया था।

पीलीभीत के 27 मदरसों का बंद होना तय

 सरकार के निर्देश पर हुई एसआईटी जांच में जिले के 27 मदरसे अवैध तरीके से संचालित होना पाए गए हैं। जांच रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है। अब इन मदरसों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है। अधिकारियों की मानें तो शासन के आदेश के बाद इन सभी अवैध मदरसों को बंद कराया जाएगा। इसे लेकर सुगबुगाहट बढ़ते ही खलबली मची हुई है।

मदरसों का संचालन मदरसा बोर्ड द्वारा किया जाता है, जबकि इनकी निगरानी अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा की जाती है। बीते डेढ़ दशक में प्रदेश भर में मदरसों की बाढ़ से आई हुई है। भारत-नेपाल सीमा से सटे इस जिले में भी बड़े पैमाने पर मदरसे खोले गए हैं। इन मदरसों का उद्देश्य तो दीनी तालीम देना है। मगर, अधिकांश मदरसे अपने उद्देश्य से इतर अन्य कामों में लग गए। मामला सरकार के संज्ञान में आने पर वर्ष 2022 में प्रदेश भर के मदरसों का सर्वे कराया गया था।

बताते हैं कि उस दौरान अधिकांश मदरसे बिना मान्यता चलते पाए गए थे। सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए करीब डेढ़ माह पूर्व प्रदेश भर की एसआईटी जांच के निर्देश दिए। जांच में प्रदेश भर में 13 हजार मदरसे अवैध तरीके संचालित होना पाए गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक इसमें पीलीभीत जिले के 27 मदरसे भी अवैध तरीके से संचालित मिले हैं। इसमें भारत-नेपाल सीमा से सटी पूरनपुर तहसील के सात मदरसे और कलीनगर तहसील क्षेत्र का एक मदरसा शामिल है। यह सभी मदरसे बिना मान्यता संचालित किए जा रहे थे। बताते हैं कि एसआईटी जांच में मदरसों में आय-व्यय का ब्यौरा भी नहीं पाया गया है। स्थानीय अधिकारियों को अब शासन के आदेश का इंतजार है। शासन का आदेश आने के बाद इन सभी 27 अवैध मदरसों को बंद कराने की बात कही जा रही है।

जिले में है 220 मान्यता प्राप्त मदरसे
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के मुताबिक जिले में 220 मदरसों का संचालन किया जा रहा है। यह सभी मदरसे मदरसा बोर्ड से मान्यता प्राप्त है। जिनकी निगरानी अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा की जा रही है। इन मदरसों में दीनी तालीम के साथ अन्य विषयों की भी पढ़ाई कराई जाती है।

जनपद स्तर पर बेखबर रहे जिम्मेदार
एसआईटी जांच के बाद अब जनपद में संचालित 27 मदरसों पर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। बताते हैं कि ये मदरसे लंबे अरसे से संचालित हो रहे थे। इनके अवैध तरीके से संचालन की बात भी सामने आ चुकी है। ऐसे में आगामी कार्रवाई से हटकर सवाल ये भी है कि अभी तक इसे लेकर जिम्मेदार बेखबर रहे। उनके स्तर से इसका पता ही नहीं लगाया जा सका। इसे लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।

सरकार के निर्देश पर मदरसों की एसआईटी जांच कराई गई थी। जिले में भी 27 मदरसे अवैध तरीके से संचालित होना पाए गए हैं।