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Saturday, March 2, 2024

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High Court’s Order: हाईकोर्ट के आदेश से साफ दिल्ली गुंडागर्दी से नहीं, कानून और संविधान से चलेगी।

Delhi will be run by law and constitution, not by the high court’s order.

  • हाईकोर्ट ने उपराज्यपाल वीके सक्सेना के आदेश पर रोक लगाते हुए कहा कि दिल्ली असेंबली रिसर्च फेलो अपने पदों पर बने रहेंगे

एलजी ने दिल्ली के जनहित के काम रोकने के अपने अभियान के तहत दिल्ली विधानसभा के फेलो को नियमविरुद्ध निकाल दिया था-आप

  • उपराज्यपाल दिल्ली को पूरी तरह से बर्बाद करने पर तुले हुए हैं, यह हाईकोर्ट के आज के आदेश से‌ साफ हो गया है- आम आदमी पार्टी
  • एलजी के पास कर्मचारियों को हटाने का अधिकार नहीं था, वह लगातार गैरकानूनी और संविधान के खिलाफ काम कर रहे हैं- आम आदमी पार्टी

High Court’s Order: दिल्ली हाईकोर्ट ने उपराज्यपाल वीके सक्सेना के दिल्ली असेंबली रिसर्च फेलो को हटाने संबंधी आदेश पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही आदेश दिया है कि दिल्ली असेंबली रिसर्च फेलो अपने पदों पर बने रहेंगे। इसके बाद आम आदमी पार्टी ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश से साफ हो गया है कि एलजी मनमाने तरीके से शक्तियों का दुरुपयोग कर रहे हैं।‌ दिल्ली दादागिरी से नहीं चलेगी बल्कि कानून और संविधान से चलेगी। एलजी ने जनहित के काम रोकने के अटने अभियान के तहत दिल्ली विधानसभा के फेलो को नियमविरुद्ध निकाल दिया था।

High Court’s Order: दिल्ली असेंबली रिसर्च फेलो के अनुबंध 5 जुलाई को उप राज्यपाल वीके सक्सेना के आदेश पर समाप्त कर दिए गए थे। इसके बाद 17 फेलो ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी। इसके बाद दिल्ली उच्च न्यायालय ने आज गुरुवार को आदेश दिया है कि दिल्ली असेंबली रिसर्च फेलो के रूप में लगे प्रोफेशनल अपने पदों पर बने रहेंगे। उन्हें स्टाइपेंड राशि दी जाएगी। अदालत ने फेलो की याचिका पर दिल्ली विधान सभा सचिवालय, सर्विसेज और वित्त विभाग को दो सप्ताह के भीतर पक्ष रखने का आदेश दिया है।

High Court’s Order: इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए आम आदमी पार्टी ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश से साफ हो जाता है कि एलजी मनमाने तरीके से शक्तियों का दुरुपयोग कर रहे हैं। दिल्ली सरकार दादागिरी से नहीं चलेगी बल्कि कानून और संविधान से चलेगी। उपराज्यपाल दिल्ली को पूरी तरह से बर्बाद करने पर तुले हुए हैं। यह हाईकोर्ट के आज के आदेश से‌ साफ हो गया है। एलजी का काम सिर्फ दिल्ली वालों को परेशान करना हैं। दिल्ली की चुनी हुई सरकार को काम करने से रोकना है। एलजी के पास कर्मचारियों को हटाने का अधिकार नहीं था। वह लगातार गैरकानूनी और संविधान के खिलाफ काम कर रहे हैं। उनका काम दिल्ली सरकार को लंगड़ा बनाने के लिए हर दिन नए तरीके ढूंढना है, ताकि दिल्ली के लोगों को परेशानी हो। इस षड्यंत्र के तहत ही युवा प्रोफेशनल को हटाया गया था।

High Court’s Order: एलजी की तरफ से दिल्ली सरकार का पूरी तरह से गला घोंटने के लिए यह काम किया था।‌ दिल्ली सरकार के काम ठप करने के लिए यह साजिश रची गई थी। दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश से साफ हो गया है कि दिल्ली असेंबली रिसर्च सेंटर के फेलो को मनमाने तरीके से शक्तियों का दुरुपयोग करके हटाया गया था। आम आदमी पार्टी ने कहा कि कुछ चुनिंदा अधिकारी और उपराज्यपाल मिलकर दिल्ली के जनहित के काम रोकने में लगे हैं। दिल्ली सरकार के कामों को हर रोज रोकने की कोशिश कर रहे हैं।

एलजी ने किया मौलिक अधिकारों का उल्लंघन और “शक्ति का दुरुपयोग

High Court’s Order: याचिकाकर्ताओं ने सुनवाई के दौरान तर्क दिया कि उनके स्टाइपेंड का भुगतान न करना और उनकी सेवाओं को बंद करना उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है और यह “शक्ति का दुरुपयोग है।

याचिकाकर्ताओं ने कहा कि वे दिल्ली असेंबली रिसर्च सेंटर में कार्यरत थे जो विधान सभा और अध्यक्ष के तत्वावधान में कार्य करता है। सेवा और वित्त विभाग द्वारा हस्तक्षेप शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत का उल्लंघन था। उनकी सेवाओं को इस तरह से समाप्त नहीं किया जा सकता है। दिल्ली विधान सभा के साथ-साथ सरकार, याचिकाकर्ताओं को उनकी सेवा की शर्तों के अनुसार नियुक्त करने के वादे से बंधी हैं।

फेलोशिप की नियुक्ति को रद्द करना सदन की अवमानना

High Court’s Order: दिल्ली उपराज्यपाल द्वारा विधानसभा के फेलोशिप हटाए जाने का मुद्दा सदन में भी उठाया गया था। आम आदमी पार्टी के विधायक संजीव झा ने चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा था कि आनन-फानन में फेलोशिप की नियुक्ति को रद्द करना सदन की अवमानना है। चर्चा के दौरान आम आदमी पार्टी के विधायक ने कुछ आंकड़े भी पेश किए और कहा कि फेलोशिप के लिए 2900 लोगों ने आवेदन किया था। दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी ने आवेदकों के इंटरव्यू लिए जो रिसर्च फेलो थे। देश विदेश की यूनिवर्सिटी से पढ़कर आए लोगों को नियुक्ति की गई। फेलो को विधायकों और मंत्री के साथ अटैच किया गया था।
संजीव झा ने कहा था कि फेलोशिप नियुक्ति को रद्द करना विधानसभा के कामकाज में अड़ंगा डालने और बदनाम करने का मामला है।

एलजी को पत्र लिखकर विधानसभाध्यक्ष ने जताई थी आपत्ति

दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष राम निवास गोयल ने दिल्ली एलजी को पत्र लिखकर आपत्ति जताई थी। राम निवास गोयल ने 7 जुलाई 2023 को उपराज्यपाल वीके सक्सेना को पत्र लिखकर कहा था कि दिल्ली विधानसभा के लिए फेलोशिप बंद करने का कोई कारण नहीं है। दिल्ली असेंबली रिसर्च सेंटर के फेलो के खिलाफ की गई कोई भी कार्रवाई दिल्ली असेंबली रिसर्च सेंटर ( डीएआरसी ) के विशेषाधिकार का उल्लंघन और सदन की अवमानना ​​माना जा सकता है।

High Court’s Order: दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष ने पत्र में कहा था कि “सेवा विभाग और वित्त विभाग द्वारा जारी किए गए ये पत्र मामले की विस्तार से जांच या कानूनी राय लिए मांगे जल्दबाजी में जारी किए गए प्रतीत होते हैं। क्योंकि फेलो और एसोसिएट फेलो उचित प्रक्रिया का पालन करने के बाद लगे हैं। गोयल ने यह भी तर्क दिया कि कार्यक्रम सेवाओं के दायरे में नहीं आता है। उन्होंने कहा, “कार्यक्रम अपने आप में कोई नियुक्ति या रोजगार नहीं है और सेवाओं के दायरे में नहीं आता है।

विधानसभाध्यक्ष के हस्तक्षेप से वापस हुआ था आदेश

विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल के हस्तक्षेप से आदेश वापस हुआ था। उन्होंने एलजी को पत्र लिखकर कहा था कि मैंने विधानसभा सचिव को आदेश दिया है कि मेरी अनुमति के बिना इन फेलो से जुड़े मामलों में कोई निर्णय न लिया जाए। युवा पेशेवरों को बिना किसी विचार-विमर्श या नोटिस के हटाना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है, इसमें बदले की बू आती है।

High Court’s Order: उहोंने कहा था कि डीएआरसी के फेलो/एसोसिएट फेलो को नियम-प्रक्रिया का पालन करने के बाद नियुक्त किया गया है। सेवा विभाग का उपराज्यपाल के सक्षम प्राधिकारी होने का तर्क देना गलत है। डीएआरसी का फेलोशिप प्रोग्राम कोई नियुक्ति या रोजगार नहीं है और यह सेवा विभाग के दायरे में नहीं आता है। फेलोशिप कोई रोजगार या नियुक्ति प्रोग्राम नहीं है।ऐसे में यह कहना कि यहां पर आरक्षण प्रावधानों का कोई उल्लंघन हुआ है गलत है।