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Friday, March 1, 2024

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Weapon Of BJP: विपक्षियों को चुप करने के लिए भाजपा का राजनीतिक हथियार बन चुकी है ईडी।

ED has become a political weapon of BJP to silence the opposition.

केंद्रीय जाँच एजेंसी नहीं बल्कि विपक्षियों को चुप करने के लिए भाजपा का राजनीतिक हथियार बन चुकी है ईडी-आतिशी भाजपा के शासन में ईडी का स्तर इस कदर गिरा चुका है कि अब ईडी भाजपा नेता का विरोध करने वाले 2 बुजुर्ग ग़रीब किसानों को समन भेज रही है-आतिशी जिन ग़रीब किसानों के बैंक खाते में मात्र 450 रुपये, भाजपा नेता का विरोध करने पर उनपर गिरी पीएमएलए की गाज-आतिशी अपने इस कारनामे से भाजपा शासित केंद्र सरकार ने देश के सामने ये प्रमाण रख दिया है कि, ईडी उनके लिए सिर्फ़ और सिर्फ़ राजनीतिक षड्यंत्र रचने का एक साधन है-आतिशी भाजपा अपने विरोधियों के ख़िलाफ़ सिर्फ़ पीएमएलए के तहत ईडी से केस इसलिए करवाती है क्योंकि इसमें बेल मिलना लगभग असंभव है-आतिशी पीएमएलए आतंकवाद और ड्रग तस्करी को रोकने के लिए बना, पर ईडी इसका इस्तेमाल भाजपा के विरोधियों को बिना बेल के जेल में रखने के लिए कर रही है-आतिशी अगर कोई विपक्ष का नेता ईडी का केस होने के बाद भाजपा में शामिल हो जाता है, तो ईडी के पास उसके ख़िलाफ़ सबूत नहीं बचता और वो केस वापिस ले लेती है-आतिशी

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Weapon Of BJP: विपक्षियों को चुप करने के लिए भाजपा का राजनीतिक हथियार बन चुकी है ईडी। 2

भाजपा शासित केंद्र सरकार में केंद्रीय जाँच एजेंसी ईडी का स्तर इस कदर गिर चुका है कि ईडी भाजपा नेता का विरोध करने वाले 2 ग़रीब किसानों को पीएमएलए के तहत समन भेज देती है, जिनके बैंक खाते में मात्र 450 रुपये है। आम आदमी पार्टी की वरिष्ठ नेता व दिल्ली कैबिनेट मंत्री आतिशी ने शनिवार को ईडी के इस चेहरे का पर्दाफ़ाश किया। आतिशी ने कहा कि, आज ईडी केंद्रीय जाँच एजेंसी नहीं बल्कि विपक्षियों को चुप करने के लिए भाजपा का राजनीतिक हथियार बन चुकी है। भाजपा के शासन में ईडी का स्तर इस कदर गिरा चुका है कि अब ईडी भाजपा नेता का विरोध करने वाले 2 बुजुर्ग ग़रीब किसानों को समन भेज रही है। जिन ग़रीब किसानों के बैंक खाते में मात्र 450 ररुपये है लेकिन उन्होंने भाजपा नेता का विरोध किया इसलिए उनपर पीएमएलए के तहत केस किया गया है।

उन्होंने कहा कि, अपने इस कारनामे से भाजपा शासित केंद्र सरकार ने देश के सामने ये प्रमाण रख दिया है कि, ईडी उनके लिए सिर्फ़ और सिर्फ़ राजनीतिक षड्यंत्र रचने का एक साधन है। और भाजपा अपने विरोधियों के ख़िलाफ़ सिर्फ़ पीएमएलए के तहत ईडी से केस इसलिए करवाती है क्योंकि इसमें बेल मिलना लगभग असंभव है। पीएमएलए आतंकवाद और ड्रग तस्करी को रोकने के लिए बना था पर ईडी इसका इस्तेमाल भाजपा के विरोधियों को बिना बेल के जेल में रखने के लिए कर रही है। लेकिन वही अगर कोई विपक्ष का नेता ईडी का केस होने के बाद भाजपा में शामिल हो जाता है, तो ईडी के पास उसके ख़िलाफ़ सबूत नहीं बचता और वो केस वापिस ले लेती है।

आप नेता आतिशी ने कहा कि, पिछले कुछ सालों से जब से भारतीय जनता शासित केंद्र सरकार आम आदमी पार्टी के नेताओं पर ईडी के द्वारा केस करवाने शुरू किए है तब से ही हम मीडिया को बता रहे है कि ये सिर्फ़ और सिर्फ़ राजनीतिक साज़िश है। ईडी का प्रयोग राजनीतिक कारणों से किया जा रहा है। आज आधिकारिक रूप से भाजपा शासित केंद्र सरकार ने देश के सामने ये प्रमाण रख दिया है कि, ईडी उनके लिए सिर्फ़ और सिर्फ़ राजनीतिक षड्यंत्र रचने का एक साधन है।

उन्होंने साझा किया कि, ईडी ने तमिलनाडु के दो बुजुर्ग किसानों जिनका नाम कन्हैयन (72 साल), कृष्णन (66 साल) जिनके बैंक खाते में मात्र 450 रुपये है, पर पीएमएलए के तहत केस दर्ज किया। ईडी ने इन 2 ग़रीब किसानों को समन भेजा जिसमें लिखा था कि, इन दोनों किसानों ने अपने खेत में 2017 में बिजली की तार लगाई जिसकी वजह से 2 भैंसों की मौत हो गई। इस कारण ईडी ने इन 2 किसानों को समन किया है। आज केंद्र सरकार की ईडी का स्तर इस कदर तक गिर चुका है।

आतिशी ने कहा कि, इन किसानों को समन करने का असली कारण इनका भाजपा नेताओं का विरोध करना था। आज यदि देश में किसी की भाजपा से दुश्मनी है, भाजपा के नेता से दुश्मनी है तो आप पर ईडी का केस किया जाएगा। इन किसानों के साथ भी यही हुआ। इनका अपने इलाक़े के भाजपा नेता जी.गुणसेखर से कई सालों से विवाद चल रहा था, इन किसानों ने उस भाजपा नेता पर केस किया, जी.गुणसेखर को जेल जाना पड़ा। इसका बदला लेने के लिए मात्र 450 रुपये की संपत्ति रखने वाले इन ग़रीब किसानों पर पीएमएलए के तहत ईडी द्वारा केस किया गया और तमिलनाडु से दिल्ली समन किया गया।

उन्होंने कहा कि, ये बिलकुल साफ़ है कि, ईडी आज केंद्र सरकार की जाँच एजेंसी नहीं है बल्कि ईडी सिर्फ़ और सिर्फ़ भाजपा का राजनीतिक हथियार है, जिसका इस्तेमाल भाजपा किसी के भी ख़िलाफ़ करती है। अपने विरोधियों पर हमला करने के लिए, विपक्षी पार्टियों को तोड़ने के लिए करती है। अगर कोई विपक्ष का नेता ईडी का केस होने के बाद भाजपा में शामिल हो जाता है, तो ईडी कहती है कि उसके पास कोई सबूत नहीं है, और वो केस वापिस ले लेती है।

ये पूरे देश ने देखा कि छगन भुजबल जिनपर महाराष्ट्र सदन स्कैम में 870 करोड़ के घोटाले का आरोप था, जिनपर ईडी का केस चल रहा था। भाजपा में शामिल होते ही ईडी ने अगली सुनवाई में मुंबई हाई कोर्ट के सामने कहा कि उनकी केस की फाइल खो गई है, इसलिए वो केस बंद करना चाहते है।

तो ये साफ़ है कि, ईडी का काम सिर्फ़ और सिर्फ़ भाजपा का विरोध करने वालों पर पीएमएलए के तहत केस करना है।

आतिशी ने कहा कि, एक और महत्वपूर्ण सवाल ये है कि अपने विरोधियों पर भाजपा सिर्फ़ पीएमएलए के तहत ईडी से ही केस क्यों करवाती है? क्योंकि इस देश में पीएमएलए एकमात्र ऐसा क़ानून है जिसमें बेल मिलना लगभग असंभव है। पीएमएलए इसलिए बना ताकि आतंकवाद और ड्रग ट्रैफ़िकिंग को रोका जा सके। इसलिए यहाँ बेल मिलना लगभग असंभव है। लेकिन इसकी जगह आज ईडी पीएमएलए का इस्तेमाल भाजपा के विरोधियों के ख़िलाफ़ कर रही है ताकि एक बार जेल में जाने के बाद भाजपा के विरोधियों को बेल नहीं मिलेगी और फिर भाजपा के प्रवक्ता टीवी पर आकर कह सकते है कि कोर्ट से भी बेल नहीं मिला।

उन्होंने कहा कि, भाजपा अपने ख़िलाफ़ लड़ रहे किसानों को, विपक्षी नेताओं को, विपक्षी मुख्यमंत्रियों को ईडी का समन भिजवा रही है क्योंकि वो अपने विरोधियों को चुप करवाना चाहती है। आज ग़रीब किसानों पर हुआ ये केस ईडी के इसी चेहरे का पर्दाफ़ाश कर रहा है।