Tuesday, May 28, 2024
36.1 C
New Delhi

Rozgar.com

36.1 C
New Delhi
Tuesday, May 28, 2024

Advertisementspot_imgspot_imgspot_imgspot_img
HomeWorld Newsबीते 10 साल में 60 करोड़ लोग अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा से जुड़े

बीते 10 साल में 60 करोड़ लोग अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा से जुड़े

नई दिल्ली/मुंबई
पिछले 10 वर्षों में 60 करोड़ लोग आर्थिक गतिविधियों की मुख्यधारा में शामिल हुए। केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मोदी सरकार के बीते दो कार्यकाल की उलब्धियों को लेकर यह दावा किया। उन्होंने कहा कि मुंबई में आयोजित एक निवेश सम्मेलन में कहा कि देश का मार्केटप्लेस पहले 70 करोड़ लोगों का था जो अब बढ़कर 130 करोड़ का हो गया है। शाह ने कहा कि श्रोताओं को लग सकता है कि यह चुनावी भाषण है, लेकिन अर्थव्यस्था की यही सच्चाई है। उन्होंने कहा, '60 करोड़ लोग अर्थव्यवस्था में योगदान नहीं कर रहे थे क्योंकि उनके पास न बैंक अकाउंट था और ना उनकी पर्चेजिंग पावर थी। बीते 10 वर्षों में उन्हें बुनियादी सुविधाएं मुहैया करवाकर नरेंद्र मोदी ने उन्हें अर्थव्यवस्था के मेनस्ट्रीम में लाया।' उन्होंने आगे कहा, 'उनकी बुनियादी जरूरतों ख्याल रखकर नरेंद्र मोदी ने उनके लिए एक स्कूटी और उनके बच्चों की पढ़ाई की चिंता की। इस तरह उन्होंने 60 करोड़ लोगों को विकास का रास्ते से जोड़ा।' शाह ने कहा बीते 10 वर्ष में सेंसेक्स भी 22 हजार से बढ़कर 73 हजार अंक तक पहुंच गया।

शाह का दावा- मोदी सरकार में महंगाई भी नियंत्रित

शाह ने यह भी कहा कि सरकार ने महंगाई को पांच प्रतिशत से नीचे रखा हुआ है जबकि कांग्रेस की अगुवाई वाली पिछली सरकार के समय यह दहाई अंक में पहुंच गई थी। शाह ने 'इंडिया ग्लोबल फोरम' के वार्षिक निवेश शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि 2014 से पहले भारतीय अर्थव्यवस्था की हालत नाजुक थी, मुद्रास्फीति ऊंचे स्तर पर थी और राजकोषीय घाटा भी नियंत्रण से बाहर था। उन्होंने कहा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के समय औसत मुद्रास्फीति 8.2 प्रतिशत थी और उसके शासनकाल के अंतिम तीन साल में तो यह दहाई अंक तक पहुंच गई थी। उन्होंने कहा, 'कांग्रेस की अगुवाई वाली संप्रग सरकार के समय मुद्रास्फीति दहाई में थी लेकिन हमारी सरकार ने इसे पांच प्रतिशत से नीचे रोक दिया है। संप्रग सरकार के समय 12 लाख करोड़ रुपये के विभिन्न घोटालों से देश का विश्वास हिल गया था और साठगांठ वाला पूंजीवाद (क्रॉनी कैपटलिजम) अपने चरम पर था।'

शाह बोले- एनडीए-यूपीए सरकार में हो तुलना

उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों में हुई प्रगति की तुलना संप्रग सरकार के शासनकाल से की जानी चाहिए। उन्होंने कहा, 'जबतक आप यह नहीं जानते कि गड्ढा कितना गहरा है, आप प्रगति को नहीं समझ सकते हैं।' उन्होंने कहा, 'संप्रग सरकार के 10 साल देश की वृद्धि गाथा से लगभग नदारद थे। आप उन वर्षों को खोज ही नहीं सकते हैं। वृद्धि के नाम पर उन 10 वर्षों में कुछ भी नहीं हुआ था। ऐसे हालात में मोदी जी ने देश की बागडोर संभाली थी।' शाह ने कहा, 'भारत अब एक आत्मविश्वासी और आत्मनिर्भर देश है, जिसने खुद को निष्क्रिय सरकार से गतिशील सरकार में, प्रतिगामी से प्रगतिशील विकास में और नाजुक अर्थव्यवस्था से शीर्ष अर्थव्यवस्था में बदल दिया है।' इसके साथ ही उन्होंने कहा कि आज भारत एक नीति-संचालित देश के रूप में उभरा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस साल के अंत तक भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार चार लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच जाएगा।

उन्होंने आगामी लोकसभा चुनाव के संदर्भ में कहा, 'हम अपनी सरकार के पिछले 10 वर्षों के प्रदर्शन और अगले 25 वर्षों के रोडमैप के साथ चुनाव में उतर रहे हैं।' उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को दूरदर्शी प्रधानमंत्री बताते हुए कहा कि वर्ष 2047 में आजादी के सौ साल पूरा होने तक भारत पूरी तरह से विकसित, आत्मनिर्भर और दुनिया की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में से एक होगा। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 तक भारत का अपना अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा 2036 ओलंपिक खेलों की मेजबानी और 2040 तक एक व्यक्ति को चंद्रमा पर भेजने का इरादा भी है।