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Friday, March 1, 2024

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India G20 Summit: जी 20 में पुतिन और शी जिनपिंग का न आना भारत के लिए बड़ा मौका।

India G20 Summit: The heads of two member countries have refused to come to this summit.

India G20 Summit: भारत में G20 शिखर सम्मेलन का आगाज़ हो चूका हैं जिसमे देश भर के राष्ट्रपति आ चुके हैं लेकिन इस शिखर सम्मेलन में दो सदस्य देशों के प्रमुखों ने आने से इनकार कर दिया है।बता दें कि रूस के राष्ट्रपति Vlamdir Putin और चीनी राष्ट्रपति C Zingping इस सम्मेलन में हिस्सा नहीं ले रहे। हालांकि उन्होंने इसके लिए किसी तरह का कारण नहीं बताया है। इस कदम को ज्यादातर भारत विरोध के रूप में देखा जा रहा है।

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India G20 Summit: जी 20 में पुतिन और शी जिनपिंग का न आना भारत के लिए बड़ा मौका। 2

भारत के लिए एक अच्छा मौका

India G20 Summit: राष्ट्रपति पुतिन युद्ध में फंसे होने के कारण देश में नहीं आ रहे। दो बड़े नेताओं के न आने से इस पूरे कार्यक्रम में ध्यान अमेरिका खींच रहा है। जी-20 में इतने मतभेदों के कारण इसे किसी एक समझौते पर पहुंचना असंभव माना जा रहा है। हालांकि एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह सभी चुनौतियां पीएम मोदी को विश्व मंच पर दबदबा बढ़ाने और भारत की भूराजनीतिक ताकत दिखाने का एक अनूठा मौका देती है। भारत में तक्षशिला संस्थान के एसोसिएट प्रोफेसर कजरी कमल ने कहा, ‘पूर्व-पश्चिम के बीच ध्रुवीकरण और उत्तर-दक्षिण देशों के बीच अंतर है। भारत एक पुल की तरह कार्य कर सकता है।’

कुछ ऐसी हैं G20 की तैयारी

India G20 Summit: दिल्ली के प्रगति मैदान में G20 की तैयारी ऊंचे स्तर पर की गयी हैं। किसी भी तरह सम्मेलन खराब न हो, इसलिए हजारों की संख्या में फोर्स तैनात की गई है। बंदरों को भगाने के लिए लंगूरों के पोस्टर लगे हैं। रिपोर्ट में आगे लिखा गया कि पीएम मोदी इस साल ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका की अपनी सफल यात्रा पर गए हैं, जो उन्हें एक मॉर्डन सुपर पावर देश के नेता के तौर पर दिखाता है। जी20 की अध्यक्षता इसे और भी महत्वपूर्ण बनाती है। इसके साथ ही चंद्रयान मिशन और आदित्य एल-1 मिशन भी भारत की ताकत दिखाते हैं।

जिंगपिंग का न आना भारत के लिए महत्वपूर्ण

India G20 Summit: चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस शिखर सम्मेलन में शामिल नहीं हुए हैं। उनके शामिल न होने को भारत के लिए फायदेमंद भी समझा जा रहा है। होनोलूलू के विदेश नीति अनुसंधान संस्थान के वरिष्ठ फेलो अखिल रमेश ने कहा, ‘मुझे लगता है कि मोदी इस अवसर को बाइडेन के साथ मिलकर ग्लोबल साउथ के नेता के रूप में खुद को स्थापित करने के अवसर के तौर पर देखेंगे। दुनिया के सबसे बड़े और दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्र एकसाथ मिलकर नए युग का निर्माण कर सकते हैं, जो सभी की जरूरतों का प्रतिनिधित्व करेगा।’

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