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Tuesday, March 5, 2024

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Homeराजनीतिक स्वार्थ के कारण से सनातन का अपमान स्वीकार्य नहीं।

राजनीतिक स्वार्थ के कारण से सनातन का अपमान स्वीकार्य नहीं।

Insulting Sanatan due to political interest is not acceptable.

नई दिल्ली: सोमवार, 25 सितम्बर, नई दिल्ली। तमिलनाडु भवन के सामने सैकड़ों संतों की उपस्थिति में सनातनियों ने सनातन विरोधियों के पुतलों का दहन कर सनातन के विरूद्ध की गयी उनकी टिप्पणियों को खारिज किया।

    आनंद पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर श्री स्वामी बालकानंद गिरी जी महाराज एवं स्वामी राघवानन्द जी महाराज, संस्थापक एवं मार्गदर्शक, दिल्ली संत महामण्डल ने उपस्थित संतों एवं सनातनी बन्धुओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि सब राजनीतिक नेता अपने स्वार्थ के लिए किसी भी धर्म के खिलाफ बोलना बंद करें और इसलिए हमारा कहना है कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्वयं इसके लिए माफी मांगे और जो भी इस प्रकार के दोषी व्यक्ति हैं उनको दंड दे। अन्य भी राज्य सरकारों के जो प्रमुख है या राजनैतिक दलों के प्रमुख है वह इस प्रकार के अशोभनीय बात करने वालों को अपने दल से निष्कासित करें। 
    श्री दूधेश्वर मंदिर के पीठाधीश्वर, श्री पंच दशनाम जूना अखाडा के अंतर्राष्ट्रीय प्रवक्ता, दिल्ली संत महामंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने कहा बड़े आश्चर्य का विषय है सरकारें अब तक इस पर मौन क्यों है, ऐसे व्यक्ति को अभिलंब गिरफ्तार करना चाहिए लेकिन इनकी चुप्पी बड़ी विषादपूर्ण वातावरण को रूप दे रही है। सनातन समाज के साथ सरकार ऐसा सौतेला व्यवहार करने का कारण बताएं। 
   महंत नारायण गिरी ने बताया सनातन विरोधियों की हेट स्पीच के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने भी याचिका पर नोटिस लिया है। हम मानते हैं की गाली - गलोच की भाषा से लोकतंत्र का अपमान होता है। हम यह भी मानते हैं कि यह भाषा लोगों को संविधान में दिए गए धार्मिक अधिकारों के पालन का विरोध करती है और संप्रदायों में वैमनस्य पैदा करती है। हम आशा करेंगे कि सुप्रीम कोर्ट इस बारे में पूरा विचार करके इन लोगों के खिलाफ सख्त कार्यवाही करने का आदेश देगा।
     विश्व हिन्दू परिषद कार्याध्यक्ष, वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक कुमार ने कहा लोकतंत्र में भाषा की शालीनता जरूरी है। स्टालिन, प्रियांक खड़गे एवं डी राजा तर्क नहीं दे रहे - गालियां तक दे रहे हैं। धमकी दे रहे हैं कि वह केवल विरोध नहीं करेंगे, अपितु सनातन को समाप्त करेंगे। यह उनका अभिमान व हताशा है। सनातन को मुगलों का अत्याचार और अंग्रेजों की चतुराई भी नही समाप्त कर सकी तो अब यह छुट भय्ये क्या कर लेंगे। सनातन विश्व बंधुत्व, प्रेम और शांति के वर्धभान होता रहेगा। विरोधी परास्त होंगे।

   महामंडलेश्वर नवल किशोर दास महाराज ने इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया। उन्होंने बताया म.म. श्री महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत जी कालिका पीठ, महंत स्वामी रामदास जी, पूरणदास जी उदासीन,   म.म. साध्वी विद्यागिरी जी,   म. म. कंचन गिरि जी संगठन महामंत्री, म.म. श्री महंत धीरेंद्र पुरी जी, कोषाध्यक्ष, श्री महन्त सोम गिरी जी महाराज, म . म. साध्वी विभानंद गिरी जी एवं महन्त मंगलदास उदासीन, कोतवाल, दिल्ली संत महामण्डल सहित विहिप दिल्ली प्रांत मंत्री श्री सुरेन्द्र गुप्ता तथा श्री भूषण लाल पराशर जी, अध्यक्ष एवं श्री अशोक सचदेवा जी, उपाध्यक्ष सनातन धर्म प्रतिनिधि सभा तथा युनाईटेड हिन्दू फ्रंट के अध्यक्ष श्री जय भगवान गोयल जी सहित हजारों की संख्या में साधू-संत एवं सनातनी बन्धु उपस्थित रहे।

म.म महन्त नवल किशोर दास जी ने आगे कहा आज जिस तरह पूरी दिल्ली से सनातन को मानने वाले सभी साधु संत बन्धु भगिनी सनातन के लिए हजारों की संख्या में दिल्ली के तमिलनाडु भवन पर एकत्रित हुए हैं, यह दर्शाता है कि सनातन का विरोध करने वालों के दिन अब जाने वाले हैं। सनातन विश्व के प्रत्येक व्यक्ति को अपने परिवार का ही सदस्य मानता है और सबके प्रति दयाभाव रखता है, मगर इसका मतलब यह नहीं कि कोई कुछ भी बोलता रहेगा और सनातन धर्म को मानने वाले चुप बैठे रहेंगे। यह धर्म अपने खिलाफ होने वाले हर प्रकार के षडयंत्रों का मुंह तोड जवाब देना जानते हैं।
उन्होंने कहा कि संत समाज इस विषय को तमिलनाडु में भी उठाएंगे, तमिलनाडु के राज्यपाल से भी मिलेंगे और उन्हें संवैधानिक दायित्वों को पूरा करने के लिए भी कहेंगे।