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महाशिवरात्रि आज, शिवजी की पूजा के लिए मिलेगा बस इतना समय, जानें शुभ मुहूर्त

फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को हर साल महाशिवरात्रि का त्योहार मनाया जाता है. शिवरात्रि दिव्य और चमत्कारी शिव कृपा का महापर्व. कहते हैं कि शिवरात्रि के दिन भगवान शिव को प्रसन्न करना बेहद आसान होता है. इस दिन महादेव की कृपा जिस पर हो जाए, उसका जीवन खुशियों से भर जाता है. इस साल महाशिवरात्रि का त्योहार शुक्रवार,आज  8 मार्च को मनाया जाएगा. आइए आपको शिवरात्रि का शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और कुछ दिव्य उपाय बताते हैं.

शिवरात्रि की महिमा
हिन्दू परंपरा के अनुसार, इस दिन शिवजी का प्राकट्य हुआ था. शिवजी का विवाह भी इस दिन माना जाता है. इस दिन व्रत, उपवास, मंत्रजाप और रात्रि जागरण का विशेष महत्व बताया गया है. शिवरात्रि की प्रत्येक पहर परम शुभ होती है. महाशिवरात्रि पर महादेव और मां पार्वती की विधिवत पूजा-अर्चना से भक्तों को मनचाहा वरदान मिलता है. ये पूजा चार प्रहर में की जाती है.

पूजा का शुभ मुहूर्त
प्रथम प्रहर की पूजा समय- 8 मार्च शाम 06.25 बजे से रात्रि 09.28 बजे तक
दूसरे प्रहर की पूजा का समय- रात 09.28 बजे से 9 मार्च मध्य रात्रि 12.31 बजे तक
तीसरे प्रहर की पूजा का समय- 9 मार्च मध्य रात्रि 12.31 बजे से सुबह 03.34 बजे तक
चतुर्थ प्रहर की पूजा का समय- 9 मार्च को सुबह 03.34 बजे से सुबह 06.37 बजे तक

इस बार क्यों खास है शिवरात्रि?
इस बार की महाशिवरात्रि पर ग्रह पांच राशियों में होंगे. चंद्र और मंगल एक साथ मकर राशि में होंगे. यह संयोग लक्ष्मी नामक योग बना रहा है. इसलिए इस बार शिवरात्रि पर धन संबंधी बाधाएं दूर की जा सकती हैं. चंद्र और गुरु का प्रबल होना भी शुभ स्थितियां बना रहा है. इस बार की शिवरात्रि पर रोजगार की मुश्किलें भी दूर की जा सकती हैं.

महाशिवरात्रि व्रत पूजा विधि
महाशिवरात्रि के दिन निर्जला व्रत रखना या केवल फलाहार व्रत रखना अच्छा होता है. सुबह जल्दी उठें, स्नान कर साफ सुथरे वस्त्र पहनकर व्रत का संकल्प लें. इसके बाद घर के नजदीक भोले शंकर के किसी मंदिर में जाएं. भगवान शिव का पंचामृत और गंगाजल से अभिषेक करें.

फिर भोलेनाथ या शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, सफेद चंदन, इत्र, जनेऊ, फल और मिठाइयां चढ़ाएं. भगवान शिव को केसर युक्त खीर का भोग लगाकर प्रसाद बांटें. ये पूजा की वो विधि है जिससे भक्तों को भगवान का वरदान ही नहीं मिलता, बल्कि हर दर्द, हर तकलीफ से मुक्ति भी मिल जाती है.

महाशिवरात्रि का व्रत मीन राशि में राहु और बुध यह दो ग्रहों एक साथ रहेंगें और चार ग्रहों का एक साथ होना संसार के लिए कल्याणकारी होगा। सूर्य, शनि, चंद्रमा, शुक्र कुम्भ राशि में विराजमान रहेंगें और माना जाता है कि शुक्र, सूर्य का एक साथ होने से सुख, समृद्धि के साथ अरोग्ययता की प्राप्ति होती है। सभी क्षेत्रों में विकास होता है। वहीं शुक्र ऐश्वर्य ,शांति सौंदर्य और सांसारिक भोगों को प्रदान करते हैं तो कुम्भ राशि में मन का कारक चन्द्रमा जो भगवान शिव के मस्तक पर विराजमान हैं ,चंद्रमा शांति शीलता, सुख, और अरोग्यता प्रदान करते हैं। महाशिवरात्रि प्रमुख त्योहार में से एक है। यह भगवान शिव के पूजन का सबसे बड़ा पर्व भी है। फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाता है। माना जाता है कि सृष्टि के प्रारंभ में इसी दिन मध्यरात्रि को भगवान शंकर का ब्रह्मा से रुद्र के रूप में अवतरण हुआ था। भगवान शिव जितनी जल्दी प्रसन्न होते हैं। उतनी ही जल्दी नाराज भी हो जाते हैं। इसलिए शिवरात्रि के दिन और पूजा में कुछ बातों ध्यान रखना जरूरी है। पूजन करते समय मन को एकाग्र कर चित्त को शान्त कर के पूजन आरम्भ करें।

महाशिवरात्रि में जागरण पूजन और उपवास का विशेष महत्व : शिवरात्रि के दिन रुद्राभिषेक पूजन जरूर करना चाहिए। इस व्रत को करने से दुःख, शोक, दरिद्रा, के साथ साथ सभी प्रकार के व्याधियों का भी शमन होने लगता है। शिवपरिवर का विधिवत षोडशोपचार पूजन कर के जागरण करना चाहिए। शिवलिंग पर सबसे पहले पंचामृत चढ़ाना चाहिए। पंचामृत यानी दूध, गंगाजल, केसर, शहद और जल से बना हुआ मिश्रण, जो लोग चार प्रहर की पूजा करते हैं। उन्हें पहले प्रहर का अभिषेक जल, दूसरे प्रहर का अभिषेक दही, तीसरे प्रहर का अभिषेक घी और चौथे प्रहर का अभिषेक शहद से करें तथा भगवान शिव को दूध, गुलाब जल, चंदन, दही, शहद, घी, चीनी और जल का प्रयोग करते हुए तिलक और भस्म लगावें। भोलेनाथ को वैसे तो कई प्रकार के ऋतु फल अर्पित किए जाते हैं, लेकिन शिवरात्रि पर बेर जरूर अर्पित करना चाहिए क्योंकि बेर को चिरकाल का प्रतीक माना जाता है।

विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकाल के दरबार में शिव नवरात्रि की धूम मची है. शिव नवरात्रि में भगवान महाकाल अपने भक्तों को अलग-अलग स्वरूप में दर्शन दे रहे हैं. महाकाल मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ आ रही है. महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य में मंदिरों को फूलों से सजाया जा रहा है. पर्व के उपलक्ष्य में भक्त महाकाल का 44 घंटे तक लगातार दर्शन कर सकेंगे.

15 लाख श्रद्धालुओं के आने की संभावना
बाबा महाकाल के दरबार में प्रतिदिन लाखों श्रद्धालुओं का आगमन लगा रहता है. इस बार भी महाशिवरात्रि पर 15 लाख श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है. मंदिर समिति और जिला प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं के लिए की जा रही व्यवस्थाओं को अब अंतिम रूप दिया जा रहा है. श्रद्धालु कहां से आएंगे और कहां जाएंगे, इसके लिए रूट प्लान जारी कर दिया गया है. कुछ दिनों पहले ही प्रशासनिक अधिकारियों ने पार्किंग स्थल से महाकाल मंदिर तक व्यवस्थाओं का जायजा लिया था.

कुंटलों फूलों से सजेगा मंदिर
महाशिवरात्रि के पहले नौ दिवसीय पर्व के दौरान बाबा महाकाल के दरबार में साज-सज्जा कराने वाले भक्त अपनी बारी आने का इंतजार करते हैं. महाकालेश्वर मंदिर में शिव नवरात्रि पर्व पर मंदिर के नंदी हॉल, गर्भगृह के साथ बाहर ओंकारेश्वर महादेव, नागचंद्रेश्वर महादेव मंदिर और शिखर पर भी आकर्षक फूलों से सजावट करवाई जा रही है. रात से ही मंदिर में फूलों से सजावट का काम शुरू हो गया था.