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Peritoneal Dialysis: जब दोनों किडनी काम करना बंद कर देती है तो बच्चों में किडनी रोगों के लिए पेरेटोनियल डायलिसिस है सस्ता और आसान उपाय।

Peritoneal dialysis is cheaper for kidney diseases in children.

नई दिल्ली
Peritoneal Dialysis: जब दोनों किडनी काम करना बंद कर देती है तो शरीर से वेस्ट प्रोडक्ट निकालने का काम नहीं हो पाता है। इस स्थिति में वयस्कों में हिमो डायलिसिस किया जाता है। आमतौर पर लोग इसी के बारे में जानते हैं परंतु इसके अलावा पेरिटोनियल डायलिसिस भी होता है, जिसे आम भाषा में पानी का डायलिसिस भी कहा जाता है। इसमें पेट के अंदर एक खास तरह का पानी डाला जाता है, जिसकी मदद से शरीर के टाक्सिक तत्व और एक्स्ट्रा पानी बाहर निकाला जाता है। यह जानकारी रविवार को नार्थ बंगाल मेडिकल कालेज दार्जिलिंग के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. सुमंत्रा ने पीडियाट्रिक्स नेफ्रोलाजी अपटेड्स विषय पर आयोजित कांफ्रेंस में दी। उन्होंने बताया कि हिमो डायलिसिस की तरह पेरिटोनियल डायलिसिस की प्रक्रिया के लिए बड़ी मशीन और सुविधाएं आवश्यक नहीं होती, इसलिए इसे आसानी से किया जा सकता है। साथ ही हिमो डायलिसिस की प्रक्रिया बड़ों के लिए बेहतर होती है परंतु कम उम्र के बच्चों के लिए यह प्रक्रिया जटिल होती है। इसलिए बच्चों के केस में पेरिटोनियल डायलिसिस बेहतर विकल्प होता है। इसके लिए बड़े सेटअप और जटिल ट्रेनिंग की जरूरत भी नहीं होती है। इसलिए गांवों के अस्पताल में भी इसे आसानी से कम खर्च में किया जा सकता है।

Peritoneal Dialysis
Peritoneal Dialysis: जब दोनों किडनी काम करना बंद कर देती है तो बच्चों में किडनी रोगों के लिए पेरेटोनियल डायलिसिस है सस्ता और आसान उपाय। 3

छोटे शहरों तक पेरिटोनियल डायलिसिस पहुंचाने का प्रयास
Peritoneal Dialysis: कांफ्रेंस की आर्गनाइजिंग सेक्रेटरी डा. शिल्पा सक्सेना ने बताया, बच्चों की किडनी की बीमारियों में किस समय कौन सी दवा देनी चाहिए, स्टेरायड का प्रयोग कब करना चाहिए और नई रिसर्च क्या चल रही है, जिनसे बेहतर फायदे मिलेंगे इन सभी विषयों पर बाहर से आए विशेषज्ञों ने जानकारी दी। साथ ही बताया कि भारत में पेरिटोनियल डायलिसिस को आए हुए 40 वर्ष से अधिक समय हो गया है, लेकिन इसकी पहुंच बड़े शहरों तक ही सीमित है। छोटे शहरों और गांवों तक यह अभी नहीं पहुंच पाई है, जहां इसकी ज्यादा जरूरत है। इसका सबसे बड़ा कारण लाजिस्टिक, ट्रेंड स्टाफ और इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी है। इसी को ध्यान में रखते हुए हमने इसके लिए विशेष हैंड्स आन वर्कशाप का आयोजन किया। डा. प्रियंका जैन और सेक्रेटरी डा. सौरभ पिपरसानिया ने बताया कांफ्रेंस में प्रदेश भर से 100 से अधिक शिशु रोग विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में पीडियाट्रिक्स डायलिसिस, बच्चों में एक्यूट किडनी इंजुरी, मैनेजमेंट आफ स्टेरायड, हायपरटेंशन गाइडलाइन इन चिल्ड्रन, यूटीआइ मैनेजमेंट जैसे विषय पर विशेषज्ञों ने जानकारी दी।

डायरिया और डिहाइड्रेशन के कारण किडनी इंजुरी की आशंका
Peritoneal Dialysis: नई दिल्ली से आई डा. कीर्तिसुधा मिश्रा ने कहा कि किडनी इंजुरी किसी भी उम्र में हो सकती है। यह नवजात से लेकर बड़ों में हो सकती है। भारत में इसका सबसे बड़ा कारण डायरिया और डिहाइड्रेशन है। जब डायरिया और डिहाइड्रेशन बहुत गंभीर हो जाता है तो किडनी इंजुरी की आशंका काफी बढ़ जाती है। बच्चों में किडनी इंजुरी के 80 प्रतिशत मामलों में कारण यही होते हैं। आज के समय यह जरूरी है कि सभी शिशु रोग विशेषज्ञों को पेरिटोनियल डायलिसिस सीख लेना चाहिए।

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Peritoneal Dialysis: जब दोनों किडनी काम करना बंद कर देती है तो बच्चों में किडनी रोगों के लिए पेरेटोनियल डायलिसिस है सस्ता और आसान उपाय। 4

बच्चों में लगाई जा सकती है एडल्ट की किडनी
Peritoneal Dialysis: नई दिल्ली से आई डा. अदिति सिन्हा ने बताया कि बड़ों की तरह बच्चों में भी किडनी ट्रांसप्लांट होते हैं। इनमें परिवार के ही किसी सदस्य की किडनी का इस्तेमाल किया जाता है। इसे लाइव रिलेटेड ट्रांसप्लांट कहा जाता है और यह बच्चों और बड़ों दोनों में सामान्य है। अगर कोई बच्चा 10 किलो से अधिक वजन का है, तो उसे एडल्ट की किडनी लगाई जा सकती है। बच्चों में किडनी की बीमारी होने का कारण अनुवांशिक, किडनी की बनावट, किडनी के बहाव के रास्ते में रुकावट आदि के कारण होती है। इस दौरान शिशुरोग विशेषज्ञ डा. शरद थोरा, डा. श्रीलेखा जोशी, डा. जीएस पटेल, डा. हेमंत जैन, डा. मुकेश बिड़ला आदि मौजूद थे।

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