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उज्जैन ‘ सिंहस्थ’ हिंदू धार्मिक मेला के लिए 18,840 करोड़ की योजना तैयार

उज्जैन

उज्जैन ' सिंहस्थ' एक हिंदू धार्मिक मेला है जो हर 12 साल में भगवान महाकाल की नगरी उज्जैन में आयोजित होता है। 5 मार्च को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मंत्रालय (सचिवालय) में सिंहस्थ 2028 के संबंध में प्रस्तावित कार्य योजना पर एक बैठक की अध्यक्षता की। इस दौरान उन्होंने कहा कि सिंहस्थ 2028 के लिए मेला स्थल या स्थल को व्यवस्थित रूप से विकसित किया जाना चाहिए।

क्षिप्रा नदी के घाटों का विस्तार किए जाने के निर्देश

पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उज्जैन-इंदौर संभाग को धार्मिक-आध्यात्मिक सर्किट के रूप में विकसित किया जाएगा। सीएम ने क्षिप्रा नदी के घाटों का विस्तार किए जाने के निर्देश दिए है, ताकि बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालु पवित्र स्नान कर सकें। साथ ही निजी वाहनों की संख्या बढ़ने से सड़क मार्ग से सिंहस्थ में आने वाले लोगों की संख्या काफी अधिक होगी। इसलिए, पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाने की भी सलाह दी गई।

18,840 करोड़ रुपये के 523 कार्य प्रस्तावित

सिंहस्थ 2028 के लिए प्रारंभिक कार्य योजना बनाई गई है, जिसमें इंदौर और उज्जैन संभाग भी शामिल हैं। 19 विभागों से संबंधित लगभग 18,840 करोड़ रुपये के 523 कार्य प्रस्तावित हैं। एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, सिंहस्थ महापर्व 2028, 27 मार्च से 27 मई तक आयोजित किया जाएगा। इस वर्ष के भव्य उत्सव में, 9 अप्रैल से 8 मई, 2028 की अवधि में तीन 'शाही स्नान' और सात 'पर्व स्नान' प्रस्तावित हैं। विज्ञप्ति के अनुसार सिंहस्थ महापर्व में लगभग 14 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है।

श्रद्धालुओं के लिए किए जाएंगे ये इंतजाम

बैठक में श्रद्धालुओं के लिए आरामदायक परिवहन, मुख्य सड़कों का विकास, नई सड़कों का निर्माण, पेयजल, पानी का शुद्धिकरण, बिजली आपूर्ति, कानून व्यवस्था और यातायात प्रबंधन, सिंहस्थ अवधि के दौरान आवास, पर्यटक स्थलों का विकास जैसे पहलू पर चर्चा की गई। सीएम ने कहा कि उज्जैन शहर में होटलों और धर्मशालाओं (सस्ते आवास) का भी नवीनीकरण किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उज्जैन से लगे ग्रामीण क्षेत्रों में भी होमस्टे को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

क्या-क्या होंगे काम?

  •     3700 मीटर लंबा फोरलेन एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने पर जोर।
  •     इंदौर गेट रेलवे स्टेशन से हरिफाटक पुल तक 800 मीटर लंबा फुट ओवर ब्रिज बनाना।
  •     116 करोड़ से महाकाल मंदिर के आसपास की सड़कों का विकास करना।
  •     153 करोड़ रुपये से रेलवे स्टेशन से महाकालेश्वर मंदिर तक रोप-वे बनाना।
  •     महाकाल सवारी मार्ग को हेरिटेज स्ट्रीट के रूप में विकसित करना।
  •     नागझिरी से दताना तक फोरलेन सड़क बनवाना।
  •     उज्जैन को जोड़ने वाले शेष छह मुख्य मार्गों को चौड़ा करना।
  •     17 घाटों का वास्तु चरित्र पुनजीर्वित करना।
  •     16 इलेक्ट्रिक बसें उपनगरीय क्षेत्रों और उज्जैन में की जाएगी संचालित।
  •     पंचकोशी यात्रा मार्ग के सात पड़ाव स्थलों पर बुनियादी कार्य कराना।