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HomeStatesMadhya Pradeshकिसानों का मान है पीएम किसान सम्मान निधि

किसानों का मान है पीएम किसान सम्मान निधि

भोपाल

भूखे पेट का जो भरण करे, वो होते हैं किसान। अनाज उगाकर मानव एवं प्राणियों के लिये अन्नदाता होते हैं किसान। इनका जितना भी सम्मान किया जाये, कम है। हम सबका पोषण करने वाले किसान भी यदा-कदा परेशानी में आ जाते थे। मौसम की मार या प्रकृति के प्रकोप से खड़ी फसलों को नुकसान और खेती-किसानी के लिये जरूरी धन की कमी से हमारे किसान पीड़ा अनुभव करते थे। पर अब ऐसा नहीं है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की संवेदनशील पहल पर किसानों को आर्थिक संबल देने के लिये 'प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि' देने की योजना लागू की गई है। इस योजना में केन्द्र सरकार द्वारा 6 हजार रुपये नकद राशि सीधे किसानों के बैंक खाते में हस्तांतरित कर दी जाती है। इस राशि से किसान खाद बीज क्रय, अपने खेतों में मिट्टी व उर्वरकता उपचार, कीटनाशक दवाओं का छिड़काव व खेती से जुड़े अन्य कार्य करते हैं। यह राशि अन्नदाताओं का मान बढ़ाने 'सम्मान निधि' के रूप में दी जाती है। देश के करोड़ों किसान और उनके परिवार केन्द्र सरकार की इस सम्मान निधि से लाभान्वित हो रहे हैं।

मध्यप्रदेश के लाखों किसानों को यह सम्मान निधि लगातार मिल रही है। दमोह जिले के सदगुवां के किसान हेमन्त पटेल कहते हैं यह सम्मान निधि हर किसान के लिए एक वरदान के समान है और उनके जैसे छोटे तबके के लाखों किसानों के लिए बड़ा सम्मान है। इसी जिले के लुहर्रा निवासी किसान हरीशचन्द्र पटेल कहते हैं जब भी उन्हें खाद-बीज की जरूरत होती है, उसी समय सम्मान निधि की किश्त मिल जाती है। हमें किसी से कर्ज लेने की जरूरत नहीं पड़ती। आगर-मालवा जिले के ताखला गांव के किसान संजय सेन बताते हैं उन्हें सम्मान निधि की किश्त नियमित रूप से मिल रही है। इससे उन्हें खाद-बीज-दवा-उर्वरक व अन्य जरूरतें पूरी करने में बड़ी राहत मिल गई है। अब वे पूरी मेहनत और मन लगाकर खेती कर रहे हैं। इसी जिले के कुलमढ़ी गांव के किसान जगदीश बगड़ावत के लिए भी यह सम्मान निधि बेहद मददगार साबित हो रही है। इससे वे अपनी खेती की लागत और तुरंत की जरूरतें पूरी करने में पूर्णत: समर्थ हो गये हैं। खेती-किसानी के लिए अब वे किसी सेठ-साहूकार से कर्ज नहीं लेते। वे कहते हैं सच्चे अर्थों में अब खेती फायदे का सौदा बन गई है। इसके लिए वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार जताना कभी नहीं भूलते।