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Convocation Ceremony: उपराष्ट्रपति ने महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को संबोधित किया।

The Vice President addressed the convocation ceremony of Maharishi Dayanand University.

  • गुरुजनों का आदर, परिजनों की सेवा और देश का सम्मान आपकी प्राथमिकता होनी चाहिए – उपराष्ट्रपति
  • आप दुनिया मे कहीं भी जाओ, पर अपने माता-पिता और बुजुर्गों का हमेशा ध्यान रखना – उपराष्ट्रपति ने छात्रों से कहा
  • आज भारत में भ्रष्टाचार के लिए कोई जगह नहीं है-उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़
  • प्रजातंत्र में कानून से ऊपर कोई नहीं होता -उपराष्ट्रपति श्री धनखड़
  • भारतीयता हमारी पहचान है भारत का हित सर्वोपरि है-उपराष्ट्रपति
  • क्वांटम कंप्यूटिंग, ग्रीन हाइड्रोजन और मशीन लर्निंग के क्षेत्र में भारत अग्रणी देश -उपराष्ट्रपति
  • उपराष्ट्रपति ने छात्रों से टेक्नोलॉजी से जुड़ने का आह्वान किया
  • उपराष्ट्रपति ने कहा भारतीय सभ्यतागत लोकाचार हमारी सांस्कृतिक धरोहर है
  • भारत की अर्थव्यवस्था सबसे तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था-उपराष्ट्रपति

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, डॉ. सुदेश धनखड़ के साथ आज अपने एकदिवसीय दौरे पर हरियाणा के रोहतक पहुंचे जहां उन्होंने महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित  दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। अपने सम्बोधन के दौरान उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा कि भारतीयता हमारी पहचान है, भारत का हित सर्वोपरि है! हमने जो विरासत पाई है, दुनिया के किसी देश ने ऐसी विरासत नहीं पाई है, हमने जो अप्रत्याशित प्रगति हाल के वर्षों में की है, दुनिया उससे अचंभित है!

दुनिया में भारत की बढ़ती शाख को का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति आईएमएफ और विश्व बैंक के अनुसार, भारत निवेश और अवसर का सबसे पसंदीदा स्थान है। डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा गुरुजनों का आदर, परिजनों की सेवा और देश का सम्मान आपकी प्राथमिकता होनी चाहिए। हम उस भारत के नागरिक हैं जहाँ बुज़ुर्गों का सम्मान होता है।कोई भी परिस्थिति हो, अपने माता-पिता का हमेशा ध्यान रखें। उनकी सेवा में ही ईश्वर है।

भारत विरोधी नरेटिव चलाने वालों को लक्ष्य करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि मुझे पीड़ा होती है जब भारत का कोई नागरिक, भारतीयता में विश्वास करने वाला, हमारे देश को नीचा दिखाता है, हमारी प्रगति को धूमिल करता है, हमारी संवैधानिक संस्थाओं को कलंकित करता है, उन्होंने कहा ऐसे लोगों को हमारे संविधान  निर्माता डॉ. अंबेडकर की ऋषि वाणी को सुनना है जिन्होंने कहा था कि  “आपको पहले भारतीय होना चाहिए, अंत में भारतीय और भारतीय के अलावा कुछ नहीं।”

उपराष्ट्रपति ने डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आप सचमुच भाग्यशाली हैं कि आप स्वयं को ‘अमृत काल’ के पारितंत्र में हैं! ‘अमृत काल’ ही हमारा ‘गौरव काल’ है। अब आपकी असीम ऊर्जा को उजागर करने और आपकी प्रतिभा और क्षमता को पूरी तरह से साकार करने के दरवाजे खुले हैं।

उपराष्ट्रपति ने कहा देश के युवा नए भारत के अगुआ हैं, इस देश में युवा दिमागों की उपलब्धियाँ असाधारण  हैं,
युवाओं ने भारत को दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने में मदद की है। उन्होंने एक ऐसा पारितंत्र बनाया है जो हमें 2030 के अंत तक तीसरी सबसे बड़ी वैश्विक अर्थव्यवस्था बना देगा। हमारे युवाओं ने कृषि क्षेत्र में क्रांति ला दी है, और देश में दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप पारितंत्र बनाया है, उन्होने आगे कहा कि उनका योगदान ऐसा है कि भारत@2047 एक विकसित राष्ट्र होगा। भारत विश्वगुरु बनेगा; इसके बारे में कोई संदेह नहीं है!


उपराष्ट्रपति ने कहा हम एक ऐसे युग में रह रहे हैं जहां भारत का प्रभाव और क्षमता हमारी सीमाओं के पार भी महसूस किया जाता है, भारत के बाहर भारतीय होना हमारे लिए आज गर्व की बात है, अपने राष्ट्र, अपनी मातृ संस्था और समाज के उत्थान में योगदान देने से बढ़कर जीवन में कोई खुशी नहीं हो सकती।

भारत की तकनीकी क्षेत्र में बढ़ती ताकत का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि हमारे देश ने उभरती विघटनकारी प्रौद्योगिकियों के दोहन में संलग्न होने के लिए दुनिया के अग्रणी देशों में से एक के रूप में बड़ी पहल की है, विघटनकारी प्रौद्योगिकी हमारे जीवन में प्रवेश कर चुकी हैं, यह हमारे कार्यस्थलों, कार्यालयों और घरों में प्रवेश कर चुकी है, हमें व्यापक जन कल्याण के लिए उनका सुरक्षित रूप में स्तेमाल करना चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि किसी भी विचार को क्रियान्वित करने के लिए साहस और दृढ़ता की आवश्यकता है उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि हमेशा याद रखें, पैराशूट तभी काम करता है जब वह खुला हो। पैराशूट की तरह महान मस्तिष्क का होना किसी काम का नहीं है यदि आप इसे खोलते नहीं हैं और बाद में आपको उसका परिणाम भुगतना पड़ेता है, इसलिए, अपने दिमाग को खुला रखें और असफलता के डर से मुक्त रहें।

धनखड़ ने कहा भारत आज तेज गति से विकास यात्रा पर आगे बढ़ रहा है और यह अब बढ़त अजेय है, भारत दुनिया की  सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बन गया है। आज आपके पास देश में अवसरों की कोई कमी नहीं है भरपूर अवसर उपलब्ध हैं आप अपनी प्रतिभा का उपयोग कीजिए।

उन्होंने कहा आप एक दशक पीछे जाएंगे तो आपको पता चलेगा कि जो सत्ता के गलियारे दलालों से भरे रहते थे उन्हें आज पूरी तरीके से दलालों से मुक्त कर दिया गया है और आज भारत में भ्रष्टाचार के लिए कोई जगह नहीं है।

उपराष्ट्रपति ने आगे कहा कि पहले कुछ लोग अपने आप को कानून से ऊपर समझते थे उनको लगता था कि कानून उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता लेकिन कानून ने उनको अपने शिकंजे में जकड़ कर यह बता दिया कि प्रजातंत्र में कानून से ऊपर कोई नहीं होता है सभी के लिए एक समान कानून होता है और सबको कानून पालन करना पड़ता है।

अंत में  उपराष्ट्रपति ने कहा कि हमें अपने राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखना चाहिए, भारत का हित सर्वोपरि है, भारतीयता में हमारा विश्वास अटूट है, हमें भारतीय होने पर गर्व होना चाहिए, हमें अपनी ऐतिहासिक उपलब्धियां पर गर्व करना चाहिए।

इस अवसर पर डॉ. (श्रीमती) सुदेश धनखड़, हरियाणा के राज्यपाल व कुलाधिपति बंडारू दत्तात्रेय, हरियाणा सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री मूल चंद्र शर्मा, लोक सभा सदस्य डॉ अरविंद कुमार शर्मा,  राज्यसभा सदस्य श्री रामचंद्र जांगडा, महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर राजबीर सिंह, श्री जस्टिस सूर्यकांत जज सुप्रीम कोर्ट, कार्यकारिणी परिषद के सदस्य, विश्वविद्यालय के प्राचार्य छात्र छात्राएं  एवं कई अन्य गणमान्य जन उपस्थित रहे।