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Wednesday, February 21, 2024

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Veer Savarkar: रणदीप हुड्डा की इन हरकतों के कारण महेश मांजरेकर ने छोड़ी थी ‘वीर सावरकर’।

Veer Savarkar: Bollywood actor Randeep Hooda will soon be seen in the biopic of freedom fighter Veer Savarkar.

Veer Savarkar: बॉलीवुड एक्टर रणदीप हुड्डा जल्द ही स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर की बायोपिक में नजर आएंगे। इस मूवी का डायरेक्शन भी खुद इन्होंने ही किया है। जबकि पहले निर्देशन का जिम्मा महेश मांजरेकर के पास था। हालांकि जब रणदीप ने इस मामले में दखल दिया और कई सारे बदलाव करवाने की कोशिश की, तो उन्होंने इस प्रोजेक्ट को छोड़ने का फैसला किया। इसका खुलासा उन्होंने एक इंटरव्यू में किया है।

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Veer Savarkar: रणदीप हुड्डा की इन हरकतों के कारण महेश मांजरेकर ने छोड़ी थी 'वीर सावरकर'। 2

Veer Savarkar: महेश मांजरेकर ने बताया कि शुरुआत में रणदीप हुडा ने कैरेक्टर के बारे में की रिसर्च से उनको इम्प्रेस्ड करने की कोशिश की। उन्होंने कहा, ‘मैं रणदीप से मिला और मैंने देखा कि वह काफी ईमानदार हैं और इस सब्जेक्ट से जुड़े हुए हैं। हमारी कुछ मीटिंग्स हुईं। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम, विश्व युद्ध से जुड़ी कई किताबें पढ़ रखी थीं। मुझे यह काफी दिलचस्प लगा। पहला ड्राफ्ट उन्हें पढ़कर भी सुनाया गया।’

महेश की स्क्रिप्ट पर रणदीप ने किया हस्तछेप

Veer Savarkar: महेश मांजरेकर ने कहा, ‘उसमें उनको कुछ दिक्कते थीं, जो कि ठीक भी था। फिर दूसरे ड्राफ्ट के दौरान भी उन्हें कुछ ऑब्जेक्शन्स थे। मैंने उनसे कहा अगर ऐसा ही होता रहा तो फिल्म में दिक्कत होगी। तब उन्होंने मुझे आश्वासन दिया कि एक बार स्क्रिप्ट तय हो जाएगी तो वो कुछ भी सवाल नहीं करेंगे।’ इसके बाद महेश ने बताया कि कैसे रणदीप अपने विचारों को फिल्म की स्क्रिप्ट में शामिल करना चाहते थे और बाद में उन सब चीजों से ही दिक्कतें पैदा हुईं। महेश ने कहा कि रणदीप फिल्म में हिटलर, इंग्लैंड के राजा, इंग्लैंड के प्रधान मंत्री को शामिल करना चाहते थे जो निर्देशक को पसंद नहीं आया। उन्होंने कहा कि इतना कुछ पढ़ने के बाद भी रणदीप कुछ बदलावों को लेकर अड़े रहे।

Veer Savarkar: महेश ने बताया, ‘उन्होंने बाद में ये कहना शुरू कर दिया कि मैं एक अलग तरीके से शूटिंग कर सकता हूं और इसमें डिसॉल्व ट्रांजिशन डाल सकता हूं। मैंने कहा अब वह मुझे बता रहे हैं कि फिल्में कैसे बनानी है। मैंने साफ कह दिया मैं अपने तरीके से डायरेक्शन करने जा रहा हूं। मुझे यह भी एहसास हुआ कि वह मुझे काम नहीं करने दे रहे हैं। मैं प्रोड्यूसर्स तक से मिला। उन्होंने मेरे साथ अच्छा व्यवहार किया। मैंने उनसे कहा, अगर हम दोनों इसका हिस्सा हैं तो यह फिल्म नहीं बनेगी। इसलिए, इसमें या तो मैं हूं या वह। शायद अब उन्हें एहसास हो रहा है कि उन्होंने गलत फैसला लिया है।’

महात्मा गाँधी की भी बायोपिक का दिया उदाहरण

Veer Savarkar: महेश ने बताया कि रणदीप लोकमान्य तिलक के ‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा’ को शामिल करना चाहते थे। मुझे आश्चर्य हुआ कि सावरकर की बायोपिक के लिए यह सब कैसे मायने रखता है। मैंने तर्क दिया कि हम सावरकर पर एक बायोपिक बना रहे थे। जब रिचर्ड एटनबरो ने गांधी (1982) बनाई, तो फिल्म श्री गांधी पर केंद्रित थी। मैंने फिल्म में महात्मा गांधी के बेटे को भी नहीं देखा। मैंने उसे समझाने की कोशिश की कि इन आंकड़ों को शामिल करना गैरजरूरी है। लेकिन वह अड़े रहे. क्योंकि उसने बहुत सारी चीज़ें पढ़ ली थीं। उसका पढ़ना अब एक जिम्मेदारी बन गया था।

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